Sarojini Naidu Biography In Hindi

 Sarojini Naidu Biography In Hindi


Sarojini Naidu Biography In Hindi



सरोजिनी नायडू एक भारतीय कवयित्री, लेखिका और राजनीतिज्ञ थीं, जिन्हें 'भारत कोकिला' के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद, भारत में हुआ था और उनका निधन 2 मार्च, 1949 को लखनऊ, भारत में हुआ था। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली पहली भारतीय महिला थीं और भारतीय राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली महिला थीं।


प्रारंभिक जीवन और शिक्षा:


सरोजिनी नायडू का जन्म एक बंगाली वैज्ञानिक अघोरनाथ चट्टोपाध्याय और कवयित्री वरदा सुंदरी देवी के घर हुआ था। उनके पिता हैदराबाद के निजाम कॉलेज में विज्ञान के प्रोफेसर थे। सरोजिनी आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं और उनके परिवार की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि थी। उन्होंने कम उम्र में अंग्रेजी, उर्दू, बंगाली और फारसी सीखी और कविता में गहरी दिलचस्पी दिखाई।


1895 में, सरोजिनी नायडू किंग्स कॉलेज, लंदन में पढ़ने के लिए इंग्लैंड गईं। वह किंग्स कॉलेज में पढ़ने वाली पहली भारतीय महिला थीं। उन्होंने 1898 में अपनी पढ़ाई पूरी की और भारत लौट आईं।


साहित्यिक कैरियर:


सरोजिनी नायडू ने छोटी उम्र में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। उनका पहला कविता संग्रह 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड' 1905 में प्रकाशित हुआ था। उनकी कविताओं पर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का गहरा प्रभाव पड़ा।


1912 में, सरोजिनी नायडू महात्मा गांधी से मिलीं, जो उनके करीबी दोस्त और संरक्षक बन गए। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और 1930 में नमक सत्याग्रह आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने पूरे भारत में बड़े पैमाने पर यात्रा की, भाषण दिए और लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।


राजनीतिक कैरियर:


सरोजिनी नायडू भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक प्रमुख हस्ती थीं। वह महात्मा गांधी की करीबी सहयोगी थीं और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई। 1925 में, वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 1930 में उन्हें इस पद के लिए फिर से चुना गया।


1947 में, भारत को स्वतंत्रता मिली, और सरोजिनी नायडू को संयुक्त प्रांत के राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया, जिसे अब उत्तर प्रदेश के रूप में जाना जाता है। वह भारत में राज्यपाल बनने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने 1949 में अपनी मृत्यु तक राज्यपाल के रूप में कार्य किया।


परंपरा:


सरोजिनी नायडू एक विपुल लेखिका और करिश्माई वक्ता थीं। उनकी कविताओं और भाषणों ने भारतीयों की पीढ़ियों को अपनी आजादी के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। वह भारतीय महिलाओं के लिए एक आदर्श थीं, जो अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रही थीं। वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी थीं और उन्होंने भारत के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


सरोजिनी नायडू भी एक नारीवादी थीं और उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम किया। वह महिलाओं की शिक्षा और मुक्ति में विश्वास करती थीं और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ लड़ीं।


भारतीय साहित्य और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सरोजिनी नायडू का योगदान बहुत अधिक है। वह एक सच्ची देशभक्त और दूरदर्शी नेता थीं। उनकी विरासत लोगों को प्रेरित करती है, और उन्हें हमेशा 'भारत कोकिला' के रूप में याद किया जाएगा।


काम करता है:


सरोजिनी नायडू की साहित्यिक कृतियों में कविताएं, नाटक और गद्य शामिल हैं। उनके कुछ उल्लेखनीय कार्यों में शामिल हैं:


  • द गोल्डन थ्रेशोल्ड (1905)
  • द बर्ड ऑफ टाइम: सॉन्ग्स ऑफ लाइफ, डेथ एंड द स्प्रिंग (1912)
  • द ब्रोकन विंग: सॉन्ग ऑफ़ लव, डेथ एंड द स्प्रिंग (1917)
  • द मैजिक ट्री: ए बुक ऑफ फैंटेसी एंड फैंटेसी (1919)
  • मुहम्मद जिन्ना: एकता के एक राजदूत (1916)

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